लोक व्यवहार

समूचे लोक व्यवहार की स्तिथि बिना नीतिशास्त्र के उसी प्रकार नहीं हो सकती जिस प्रकार भोजन के बिना प्राणियों के शरीर की स्तिथि नहीं रह सकती ! शुक्र नीति
एक टिप्पणी भेजें