सत्‍य और सत्‍य

सत्‍य को ग्रहण करने और असत्‍य को छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिए। -- स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती

1 टिप्पणी:

Rakesh Kumar ने कहा…

मानसी जी आपने सुन्दर सारगर्भित वचन प्रस्तुत किये हैं.

मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.