पापों से मुक्ति


कुछ धर्मों में जाने-अनजाने किए गए पापों से मुक्ति के लिए प्रायश्चित जैसे उपाय बताए गए हैं। कुछ धर्मों के आचार्यों का मत है कि किए गए पाप कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है। जो अपने पाप पर पश्चाताप करते हैं और प्रभु से क्षमा की भीख मांगते हैं, उन्हें दयानिधि भगवान से क्षमा मिलनी संभव है। 
एक बार एक अपराधी को अपने गुनाहों के लिए जेल में लंबा समय बिताना पड़ा था। जेल में नमाज पढ़ते समय उसे आभास हुआ कि उसने अपराधों में लिप्त रहकर ऐसा गुनाह किया है कि अब उसे दोजख (नरक) में भी जगह नहीं मिलेगी। सजा पूरी होने के बाद जेल से छूटते ही वह बाबा फरीद के पास पहुंचा। उसने बाबा के समक्ष अपने द्वारा किए गए गुनाह कुबूल किए और पूछा, ‘यह बताएं कि पवित्र कुरान इस विषय में क्या कहती है?’ 
बाबा फरीद ने बताया, ‘पाक कुरान में कहा गया है कि इनसान का जिस्म पाकर कोई तैश या खता से खाली नहीं। बड़ी से बड़ी हस्ती भी शैतान की गुमराही में फंस जाती है। होश आते ही उसको चाहिए कि अल्लाह से अपने किए गुनाहों की क्षमा मांगे। वह अवश्य उसे बख्शेगा। लेकिन इससे यह नहीं मान लेना चाहिए कि इरादतन गुनाह इस भरोसे करो कि बाद में अल्लाह से तौबा मांग लेंगे। याद रखो, अल्लाह दिल के अंदर तक की बात जानता-सुनता है। पाक कुरान में कहा गया है कि ईमान लाना और गुनाहों से तौबा करना उसी वक्त तक काम आता है, जब तक अल्लाह की नसीहत चलती रहती है।’ उस व्यक्ति ने तभी अपना जीवन अल्लाह को याद करने में बिताने का संकल्प ले लिया।
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