उन्‍नति

अपनी उन्‍नति और शत्रु का विनाश यही दो बातें नीति की है। इन्‍ही दोनो को अंगीकार कर कुशल पुरूष अपनी वाकचतुरता का विस्‍तार करते है। --- माघ
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