पुरूषार्थ

लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए अपनी समस्‍त शक्तियों द्वारा परिश्रम करना ही पुरूषार्थ है । --- पतंजलि 

कोई टिप्पणी नहीं: